शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग की बुनियादी जानकारी क्या है ? | What is the basic information about trading in stock market?

यदि ट्रेडिंग को आसान भाषा में कहा जाए तब इसका मतलब व्यापार करना होता है, किसी वस्तु का लेन-देन।
शेयर मार्केट में ट्रेडिंग का अर्थ किसी वस्तु की जगह शेयर्स की खरीद और बिक्री की जाती है। ट्रेडिंग से काफी जोखिम भी जुड़े हुए होते हैं, क्योकि शेयर मार्केट में शेयर के प्राइस में उतार-चढाव होती रहती है।




Most Important Topic of Trading

1. ट्रेडिंग क्या है ?
2. शेयर मार्केट में कैंडल क्या है ?
3. शेयर मार्केट में Candlestick wick क्या है ?
4. शेयर मार्केट में Support and Resistance Level क्या होते है ?
5. Support Level क्या होता है?
6. Resistance Level क्या होता है?
7. Trend-Line क्या होती है?
Part of Price - Action

ट्रेडिंग क्या है? | What is trading in hindi ?

यदि ट्रेडिंग को आसान भाषा में कहा जाए तब इसका मतलब व्यापार करना होता है, किसी वस्तु का लेन-देन।

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग का अर्थ किसी वस्तु की जगह शेयर्स की खरीद और बिक्री की जाती है। ट्रेडिंग से काफी जोखिम भी जुड़े हुए होते हैं, क्योकि शेयर मार्केट में शेयर के प्राइस में उतार-चढाव होती रहती है।

यहाँ पर अगर इंट्राडे ट्रेडिंग (intraday trading in hindi) की बात करें इसमें जितना मुनाफा कमाने का मौका होता है उतने ही जोखिम भी होते है। अधिकतर लोग इंडेक्स जैसे- निफ्टी और बैंकनिफ्टी में ऑप्शन ट्रेडिंग करते हैं

इसलिए ट्रेड करने से पहले ज़रूरी होता है किसी भी स्टॉक की अच्छे से और पूरी जानकारी लेना, जिसकी सही शुरुआत के लिए आप ट्रेडिंग से जुड़े कोर्स कर सकते है। यहाँ बात करेंगे की ट्रेडिंग सीखने के अलग-अलग विकल्प कौन से है।


ट्रेडिंग मैं आगे बढ़ने से पहले कुछ चीजो को जानना जरुरी है –


शेयर मार्केट में कैंडल क्या है? What is candle in share market in hindi ?

शेयर मार्केट में कैंडल किसी स्टॉक के प्राइस मूवमेंट को दर्शाती हैं। यह अलग-अलग कैंडल स्टिक चार्ट पैटर्न्स के द्वारा ट्रेडर्स को प्राइस एक्शन समझने में मदद करती हैं। साथ ही लाल और हरी कैंडल्स बताती है कि मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे। अगर बाजार बुलिश है तो हरी कैंडल और अगर बेरिश है तो लाल कैंडल बनती है।
basic candle शेयर मार्केट में कैंडल्स को ही कैंडलस्टिक भी बोला जाता है क्योंकि यह डंडी या स्टिक के आकार की होती है। कैंडलस्टिक बुलिश या बेरिश दोनों में से एक हो सकती है। अगर कैंडल स्टिक हरे रंग की है तो यह प्राइस के बढ़ने का संकेत देती है और अगर लाल रंग की है तो वह प्राइस के गिरने का संकेत देती है।

आप देखते हैं कि सभी कैंडल्स का आकार अलग अलग होता है;
कुछ candles बहुत बड़ी और लंबी होती हैं तो कुछ candles बहुत छोटी होती हैं।
किसी कैंडल की vick या shadow बहुत बड़ी तो किसी की बिल्कुल ना के बराबर होती है।
इसी प्रकार किसी कैंडल की बॉडी बहुत बड़ी तो किसी की body ना के बराबर होती है।


शेयर मार्केट में Candlestick wick क्या है? | What is candlestick wick in share market in hindi ?

इसके अलावा बॉडी के ऊपर और नीचे जो डंडी या विक होती है उन्हें Upper Shadow और Lower Shadow बोला जाता है या shadow को विक भी बोला जा सकता है।
ये wick कैंडल मैं buyers और seller की फाइट को दर्शाती है, जिस कैंडल मैं wick जितनी बड़ी होगी उस कैंडल मैं buyers या seller का उतना ही प्रेसर होगा । hammer wickमतलब डाउन ट्रेंड मैं अगर हैमर कैंडल बने जिस मैं उसकी lower wick ये दर्शाती है की पहले seller ने कैंडल को नीच ले जाने मैं सफल हुए किन्तु कैंडल के खत्म होने से पहले buyers ने कैंडल को ऊपर लेने मैं सफल हो गए मतलब इस कैंडल मैं buyer ज्यादा पावरफुल है ।


शेयर मार्केट में Support and Resistance Level क्या होते है ? | What are Support and Resistance Levels in share market in hindi?

शेयर मार्केट में सपोर्ट और रजिस्टेंस वह इंडिकेटर है जो ट्रेडर्स को buying और selling zone के बारे में बताते हैं। मतलब ट्रेडिंग करते समय चार्ट पर कुछ ऐसे पॉइंट होते हैं जहां से प्राइस बढ़ना या गिरना शुरू होता है जिन्हें हम Support और Resistance level कहते हैं।

सपोर्ट और रेजिस्टेंस यह दोनों लेवल ही टेक्निकल एनालिसिस में बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इन levels पर बहुत सारे ट्रेडर्स ने अपनी buying या selling पोजिशन पहले से बनाई होती हैं मतलब बहुत बड़ा माल खरीदा या बेचा हुआ होता है और इसीलिए प्राइस जब-जब उस लेवल को टच करता है तो वहां से गिरना या बढ़ना शुरू हो जाता है और ऐसा कई बार होता है क्योंकि buyer या seller उस लेवल को टूटते हुए नहीं देखना चाहते हैं। और अगर वह सपोर्ट या रेजिस्टेंस लेवल टूटता है मतलब प्राइस जिस resistance लेवल से टकराकर बार-बार नीचे जा रहा था अगर इस बार प्राइस नीचे ना जाकर ऊपर की ओर चला जाता है मतलब रेजिस्टेंस लेवल को तोड़ देता है तो इसे हम ब्रेकआउट कहते हैं। और ऐसी स्थिति में हमें ऊपर की ओर एक बड़ा upside move ⬆️ देखने को मिलता है यानी कि मार्केट bullish यानी बढ़ना शुरू हो जाता है और मार्केट में uptrend 📈 की शुरुआत हो जाती है। ठीक इसी प्रकार जब प्राइस सपोर्ट लेवल को तोड़ता है तो हमें एक बढ़ा downside move ⬇️ देखने को मिलता है।


Support Level क्या होता है?

जिस लेवल से टकराकर प्राइस बार-बार ऊपर की ओर जाता है उसे हम सपोर्ट लेवल कहते हैं। शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर का सपोर्ट, खरीद-बिक्री के दौरान अपने आप बन जाता है | जब किसी कंपनी के शेयर में गिरावट होती है तो शेयर का एक लेवल ऐसा होता है जहाँ बड़े-बड़े निवेशक को शेयर की कीमत अट्रेक्टिव लगने लगती है, तथा निवेशक उस लेवल पर खरीदारी करने लगते है | अचानक खरीदारी से डिमांड आती है तथा शेयर की कीमत में तेज़ी आ जाती है |

जब शेयर की कीमत ऊपर चली जाती है तो निवेशक खरीदारी बंद कर देते है लेकिन अब बाजार में लाभ बुक करने वाले एक्टिव हो जाते है जिस कारण मार्केट में फिर सप्लाई आती है और शेयर फिर उसी लेवल पर आ जाता है जहाँ से निवेशक ने बड़ा निवेश किया था |

एक बार फिर निवेशक को शेयर की कीमत अट्रेक्टिव लगती है, जिससे वो खरीदारी करने लगते है जिससे फिर डिमांड आती है तथा शेयर की कीमत वापस ऊपर चली जाती है | शेयर बाज़ार में निवेश की शुरुआत कैसे करें !
यह प्रक्रिया कई बार होने से खरीदारी का एक लेवल बन जाता है जिसे सपोर्ट लेवल कहा जाता है । इस Support के एरिया को Demand zone भी कहा जा सकता है ।
SNR

Resistance Level क्या होता है?

आपने देखा होगा किसी स्टॉक का प्राइस बार-बार किसी पार्टिकुलर लेवल से टकराकर नीचे गिरने लगता है तो उस लेवल को हम रेजिस्टेंस कहते हैं।

शेयर बाजार में कंपनी के शेयर का सपोर्ट बनता तथा टूटता रहता है । किसी भी कंपनी का रेजिस्टेंस वह लेवल होता है, जहाँ पर निवेशक/ट्रेडर शेयर को बेचना स्टार्ट करते है ।

जब निवेशक तथा ट्रेडर को लगता है कि शेयर की कीमत अपने फेयर वैल्यू से ऊपर चली गयी है तो ट्रेडर/निवेशक शेयर को बेचना आरंभ कर देतें है ऐसा बार-बार करने से बिकवाली का एक लेवल बन जाता है, जिसे रेजिस्टेंस(Resistance) कहा जाता है । इस Resistance के एरिया को supply zone भी कहा जा सकता है ।


Demand-Supply Zone

Trend-Line क्या होती है?

जब कोई शेयर या इंडेक्स हाईयर-लो या लोअर-हाई बनाते हुए ट्रेड करें तो इन हाईयर-लो या लोअर-हाई ट्रेंडलाइन को मिलाती हुई एक रेखा खींचने पर यदि यह एक लाइन में होते है तो इसे ट्रेंडलाइन (Trend Line) कहा जाता है ।

सामान्यतः हाईयर-लो बनाते हए ट्रेंडलाइन में बायर(Buyer) तथा तथा लोअर-हाई बनाने वाले ट्रेंडलाइन में सेलर(Seller) हावी होते है। Trend-Line

एक चार्ट पर कई trendlines बनायी जा सकती हैं। ट्रेडर्स चैनल बनाने के लिए अक्सर एक टाइम फ्रेम के हाई प्राइस को कनेक्ट करते हुए एक ट्रेंडलाइन खींचते हैं और दूसरी ट्रेंडलाइन लो प्राइस को कनेक्ट करते हुए खींचते हैं। चैनल का उपयोग एक टाइम फ्रेम में सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस लेवल का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।

लेकिन ट्रेंडलाइन का उपयोग ट्रेडर्स चैनल के बाहर ब्रेकआउट या स्पाइक की पहचान करने के लिए करते हैं। साथ ही trendlines का प्रयोग trade में एंट्री और एग्जिट के लिए भी किया जाता है। इसके हिसाब से ट्रेडर्स अपने ट्रेड प्लान बनाते हैं।